बजट 2026 और शेयर बाजार का कोहराम: "मार्केट का काम है ऊपर-नीचे होना," पीएम के आर्थिक सलाहकार ने निवेशकों को क्यों दी धैर्य की सलाह?

नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट: रंजीत कुमार (Media Source Hub) ​भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में बजट का दिन हमेशा से ही उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन बजट 2026 ने दलाल स्ट्रीट पर जो हलचल पैदा की, उसने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में बजट पेश किए जाने के दौरान जैसे ही 'टैक्स' और 'कैपिटल गेन्स' जैसे शब्दों का जिक्र हुआ, शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढहने लगा। सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस ऐतिहासिक गिरावट ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया। ​इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने इस गिरावट को "सामान्य" करार देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "बाजार का काम ही ऊपर और नीचे जाना है (Markets go up and down)।" आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बजट के दिन ऐसा क्या हुआ कि बाजार क्रैश हो गया और सरकार के इस रुख के पीछे की असली कहानी क्या है।
​1. बजट भाषण और बाजार का 'ब्लैक डे' ​बजट पेश होने से पहले निवेशकों को उम्मीद थी कि सरकार मिडिल क्लास और निवेशकों को राहत देगी। लेकिन जैसे-जैसे बजट के प्रावधान सामने आए, बाजार का सेंटिमेंट नकारात्मक होता गया। सेंसेक्स करीब 1,500 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी ने भी 450 अंकों से ज्यादा की गोता लगाई। महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों की करीब 10 से 12 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई।
 ​2. गिरावट के मुख्य कारण: टैक्स का 'ट्रिपल डोज' ​बाजार की इस गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण माने जा रहे हैं, जिन्होंने निवेशकों, खासकर शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स की कमर तोड़ दी: ​
• STT (Security Transaction Tax) में भारी बढ़ोतरी: सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स (F&O) ट्रेडिंग पर लगने वाले टैक्स को काफी बढ़ा दिया है। अब फ्यूचर्स पर टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% और ऑप्शन्स पर 0.15% कर दिया गया है। ट्रेडर्स के लिए यह लागत बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
​Long Term Capital Gains (LTCG) में बदलाव: निवेशकों को उम्मीद थी कि LTCG की सीमा बढ़ाई जाएगी, लेकिन सरकार ने टैक्स स्ट्रक्चर को और सख्त कर दिया। ​
• बायबैक पर टैक्स का बोझ: अब तक कंपनियां अपने शेयर वापस खरीदकर (Buyback) निवेशकों को टैक्स-फ्री फायदा देती थीं, लेकिन नए नियमों के अनुसार, अब बायबैक से होने वाली आय पर भी टैक्स लगेगा। ​
3. संजीव सान्याल का बयान: क्या यह वाकई सामान्य है? ​जब मीडिया ने प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल से बाजार के इस 'क्रैश' पर सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक (Pragmatic) जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बजट को एक दिन की शेयर बाजार की चाल से नहीं मापना चाहिए। ​
उनके बयान के प्रमुख बिंदु:
दीर्घकालिक नजरिया (Long-term Vision): सान्याल ने तर्क दिया कि बजट का उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure), राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने और रोजगार सृजन पर होता है। शेयर बाजार अक्सर तात्कालिक खबरों पर 'ओवर-रिएक्ट' करता है। ​
सट्टेबाजी पर लगाम: उन्होंने संकेत दिया कि F&O सेगमेंट में सट्टेबाजी बहुत बढ़ गई थी। सेबी (SEBI) की रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स को F&O में घाटा हो रहा है। सरकार टैक्स बढ़ाकर छोटे निवेशकों को इस जोखिम भरे खेल से दूर रखना चाहती है। ​
3 अर्थव्यवस्था की मजबूती: सान्याल के अनुसार, भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ और अन्य आर्थिक आंकड़े मजबूत हैं। बाजार आज गिरा है, तो कल फिर संभल जाएगा, क्योंकि भारत की फंडामेंटल इकोनॉमी सही रास्ते पर है। ​
4. विशेषज्ञों की राय: क्या निवेश का सही समय है? ​बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के दिन होने वाली गिरावट अक्सर उन लोगों के लिए मौका होती है जो लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं। ​
• रिटेल निवेशकों के लिए सलाह: जानकारों का कहना है कि पैनिक सेलिंग (डर में आकर बेचना) सबसे बड़ी गलती हो सकती है। अगर आप अच्छी क्वालिटी के स्टॉक्स में हैं, तो बाजार का यह उतार-चढ़ाव आपके पोर्टफोलियो को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाएगा। ​
• फिस्कल कंसोलिडेशन: सरकार ने इस बजट में राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य रखा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रेटिंग के लिए अच्छा है। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) आने वाले समय में वापस भारतीय बाजार की ओर रुख कर सकते हैं। ​
5. सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया ​सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे 'X' (ट्विटर) पर "Budget 2026" और "Stock Market Crash" ट्रेंड कर रहा है। जहां एक तरफ ट्रेडर्स सरकार को कोस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग संजीव सान्याल के बयान को सही ठहरा रहे हैं। लोगों का कहना है कि शेयर बाजार जुआ नहीं है, और अगर सरकार सट्टेबाजी को हतोत्साहित कर रही है, तो यह लंबी अवधि में छोटे निवेशकों के हित में ही होगा। ​6. भविष्य की राह: क्या होगा आगे? ​संजीव सान्याल के बयान के बाद यह साफ है कि सरकार बाजार की तात्कालिक गिरावट से डरकर अपने फैसलों को वापस लेने वाली नहीं है। सरकार का पूरा ध्यान वित्तीय अनुशासन और सस्टेनेबल ग्रोथ पर है। आने वाले हफ्तों में बाजार धीरे-धीरे स्थिर होगा, लेकिन यह साफ है कि अब 'इजी मनी' या सट्टेबाजी के जरिए पैसा कमाना मुश्किल होने वाला है। ​
निष्कर्ष: 
बजट 2026 ने एक कड़ा संदेश दिया है—भारत अब केवल उपभोग (Consumption) पर नहीं, बल्कि निवेश और वित्तीय सुरक्षा पर ध्यान दे रहा है। संजीव सान्याल का "ऊपर-नीचे" वाला बयान निवेशकों को यह याद दिलाने के लिए काफी है कि बाजार का शोर अस्थायी है, लेकिन देश की आर्थिक नीतियां स्थायी प्रभाव डालती हैं।
 ​Author: Ranjeet Kumar For more such insightful updates, keep following Media Source Hub

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